Showing posts with label Hindi. Show all posts
Showing posts with label Hindi. Show all posts

Tuesday, July 26, 2011

डर

जब ना डर हो और ना कोई आकांक्षा,
और स्वप्न हो गए हों खाली.
जब हो इतने स्वतंत्र,
रहे केवल अब और आज.
उस पल की आकांक्षा में, स्वतंत्रता में, रहेगा यह मन तब तक
इस डर के बंधन में.


(When there exist no fear and no hope,
And the dreams are all empty.
When there is absolute freedom,
And just a now, not past nor future.
In the hope of that moment and that freedom, I shall remain
Fearful.)

Sunday, January 30, 2011

कब

यूँ पूरा जीवन जी गए हम कि
एक छब्बीस साल के साये में बावन साल की प्रज्ञता समा गयी.
फिर,
मैं ख़त्म हो गयी 
और तुम भी ख़त्म हो गए. 

Monday, November 1, 2010

11/01 8:36 am Pacific Time

चाह से जेब अभी भी उतनी ही भरी है जितनी सालों पहले थी.
निराशाओं से खेलते-खेलते हाथ इतना सूज गया है कि जेब में घुसता ही नहीं है.

Wednesday, August 4, 2010

Of Dad

एड़ी से जुड़ी थी उसके
चार साल में समझ ना पाई थी |
सांझ के धुंधलके में
घसीटती जाती, संभल न पाई थी |
हल्की सी थी चढ़ बैठी काँधे पर
अपनी ही परछाई से डर कर |
इस बार जुड़ के पिता से
और उनकी परछाई से |